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Gita / Chapter 1.29
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति | वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते

Transliteration

sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati . vepathuśca śarīre me romaharṣaśca jāyate

English

And there is trembling in my body, and there is horripillation; the Gandiva (bow) slips from the hand and even the skin burns intensely.

Hindi

।।1.28 1.29।।अर्जुन ने कहा — हे कृष्ण !  युद्ध की इच्छा रखकर उपस्थित हुए इन स्वजनों को देखकर मेरे अंग शिथिल हुये जाते हैं,  मुख भी सूख रहा है और मेरे शरीर में कम्प तथा रोमांच हो रहा है।

Sanskrit
English
सीदन्ति
fail
मम
my
गात्राणि
limbs
मुखम्
mouth
च
and
परिशुष्यति
is parching
वेपथुः
shivering
च
and
शरीरे
in body
मे
my
रोमहर्षः
horripilation
च
and
जायते
arises.No
Hindi

मनसंभ्रम के कारण मानसिक रोगी के शरीर में उत्पन्न होने वाले लक्षणों को यहाँ विस्तार से बताया गया है। जिसे संजय ने करुणा कहा थाउसकी वास्तविकता स्वयं अर्जुन के शब्दों से स्पष्ट ज्ञात होती है। वह कहता है इन स्वजनों को देखकर ৷৷৷৷৷৷.मेरे अंग कांपते हैं৷৷৷৷৷৷৷৷৷৷. इत्यादि।आधुनिक मनोविज्ञान में एक व्याकुल असन्तुलित रोगी व्यक्ति के उपर्युक्त लक्षणों वाले रोग का नाम चिन्ताजनित नैराश्य की स्थिति दिया गया है।