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Gita / Chapter 12.19
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् | अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः

Transliteration

tulyanindāstutirmaunī santuṣṭo yena kenacit . aniketaḥ sthiramatirbhaktimānme priyo naraḥ

English

The person to whom denunciation and praise are the same, who is silent, content with anything, homeless, steady-minded, and full of devotion is dear to Me.

Hindi

जिसको निन्दा और स्तुति दोनों ही तुल्य है, जो मौनी है, जो किसी अल्प वस्तु से भी सन्तुष्ट है, जो अनिकेत है, वह स्थिर बुद्धि का भक्तिमान् पुरुष मुझे प्रिय है।।

Sanskrit
English
तुल्यनिन्दास्तुतिः
to whom censure and praise are eal
मौनी
— silent
सन्तुष्टः
contented
येनकेनचित्
with anything
अनिकेतः
homeless
स्थिरमतिः
steadyminded
भक्तिमान्
full of devotion
मे
to Me
प्रियः
dear
नरः (that)
man.
Hindi

जो शत्रु और मित्र में सम है किसी व्यक्ति को शत्रु या मित्र के रूप में देखना मन का काम या खेल है। य़द्यपि ज्ञानी पुरुष किसी से शत्रुता नहीं रखता? परन्तु अन्य लोग उसके प्रति शत्रु या मित्र भाव रख सकते हैं। उन दोनों के साथ एक भक्त समान रूप से व्यवहार करता है।जो मान और अपमान में सम है स्वयं को सम्मानित या अपमानित अनुभव करना बुद्धि का धर्म है। बुद्धि अपने ही मापदण्ड निर्धारित करके लोगों के व्यवहार का मूल्यांकन करती रहती है। जिस किसी प्रकार के व्यवहार से मनुष्य सम्मानित अनुभव करता है? वही उ