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Gita / Chapter 12.2
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

श्रीभगवानुवाच | मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते | श्रद्धया परयोपेताः ते मे युक्ततमा मताः

Transliteration

śrībhagavānuvāca . mayyāveśya mano ye māṃ nityayuktā upāsate . śraddhayā parayopetāḥ te me yuktatamā matāḥ

English

The Blessed Lord said Those who meditate on Me by fixing their minds on Me with steadfast devotion (and) being endowed with supreme faith-they are considered to be the most perfect yogis according to Me.

Hindi

श्रीभगवान् ने कहा — मुझमें मन को एकाग्र करके नित्ययुक्त हुए जो भक्तजन परम श्रद्धा से युक्त होकर मेरी उपासना करते हैं, वे, मेरे मत से, युक्ततम हैं अर्थात् श्रेष्ठ हैं।।

Sanskrit
English
मयि
on Me
आवेश्य
fixing
मनः
the mind
ये
who
माम्
Me
नित्ययुक्ताः
ever steadfast
उपासते
worship
श्रद्धया
with faith
परया
supreme
उपेताः
endowed
ते
those
मे
of Me
युक्ततमाः
the best versed in Yoga
मताः (in
My) opinion.
Hindi

अपने उत्तर के प्रारम्भ में ही भगवान् उन तीन अत्यावश्यक गुणों को बताते हैं? जिनके होने पर ही ईश्वर की भक्ति का निश्चित लाभ मिल सकता है। सामान्यत? लोगों की यह धारणा है कि भक्तिमार्ग अत्यन्त सरल है। परन्तु यह भी उतना ही सत्य है कि जो साधक अपना जो मार्ग स्वयं चुनता है? उसके लिए वह मार्ग कठिन नहीं होता है। मार्गों की भिन्नता केवल प्रयुक्त साधनों अर्थात् उपाधियों के कारण ही है। एक नौका के द्वारा ग्राँडट्रंक रोड् की यात्रा नहीं की जा सकती है और न हवाई जहाज के द्वारा समुद्र यात्रा? और न ही साइक