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Gita / Chapter 13.2
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

श्रीभगवानुवाच | इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते | एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः

Transliteration

śrībhagavānuvāca . idaṃ śarīraṃ kaunteya kṣetramityabhidhīyate . etadyo vetti taṃ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ

English

The Blessed Lord said O son of Kunti, this body is referred to as the ‘field’. Those who are versed in this call him who is conscious of it as the ‘knower of the field’.

Hindi

श्रीभगवान् ने कहा — हे कौन्तेय ! यह शरीर क्षेत्र कहा जाता है और इसको जो जानता है, उसे तत्त्वज्ञ जन, क्षेत्रज्ञ कहते हैं।।

Sanskrit
English
इदम्
this
शरीरम्
body
कौन्तेय
O son of Kunti (Arjuna)
क्षेत्रम्
the field
इति
thus
अभिधीयते
is called
एतत्
this
यः
who
वेत्ति
knows
तम्
him
प्राहुः (they)
call
क्षेत्रज्ञः
the knower of the field
इति
thus
तद्विदः
the knowers of that.
Hindi

पूर्णत्व का अनुभव आत्मरूप से होता है? न कि दृश्य रूप से। हिन्दू ऋषियों का इस विषय में एकमत है कि अन्तर्मुखी होकर आत्मविचार करना ही आत्मबोध तथा उसके साक्षात् अनुभव का साधन मार्ग है। इस अध्याय में आत्मा और उसकी उपाधियों का सुन्दर दार्शनिक पद्धति से विभाजन किया गया है। आत्मानात्मविवेक जनित बोध ही साधक को दर्शायेगा कि किस प्रकार पारमर्थिक सत्य की दृष्टि से जड़ अनात्मा का आत्यन्तिक (सर्वथा) अभाव है।जाग्रत पुरुष ही अपनी किसी एक विशेष मनस्थिति से स्वप्नद्रष्टा बन जाता है? और जब तक स्वप्न बना