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Gita / Chapter 13.25
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना | अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे

Transliteration

dhyānenātmani paśyanti kecidātmānamātmanā . anye sāṅkhyena yogena karmayogena cāpare

English

Through meditation some realize the Self in (their) intellect with the help of the internal organ; others through Sankhya-yoga, and others through Karma-yoga.

Hindi

कोई पुरुष ध्यान के अभ्यास से आत्मा को आत्मा (हृदय) में आत्मा (शुद्ध बुद्धि) के द्वारा देखते हैं; अन्य लोग सांख्य योग के द्वारा तथा कोई साधक कर्मयोग से (आत्मा को देखते हैं )।।

Sanskrit
English
ध्यानेन
by meditation
आत्मनि
in the self
पश्यन्ति
behold
केचित्
some
आत्मानम्
the Self
आत्मना
by the self
अन्ये
others
सांख्येन योगेन
by the Yoga of knowledge (by the Sankhya Yoga)
कर्मयोगेन
by Karma Yoga
च
and
अपरे
others.
Hindi

सर्वोपाधिविनिर्मुक्त आत्मा का शुद्ध स्वरूप में अनुभव करना ही आध्यात्मिक साधना का अन्तिम लक्ष्य है? जिसके सम्पादन के लिए अनेक उपाय? विकल्प यहाँ बताये गये हैं। मानव का व्यक्तित्व सुगठन उसी स्थिति से प्रारम्भ होना चाहिए जहाँ वर्तमान काल में मनुष्य स्वयं को पाता है। क्रमबद्ध पाठों के बिना कोई भी शिक्षा सफल नहीं हो सकती।अत्यन्त अशुद्ध एवं चंचल मन के व्यक्ति के आत्मविकास के लिए भी अनुकूल साधन का होना आवश्यक है। पूर्णत्व के सिद्धांत को केवल बौद्धिक स्तर पर समझने से ही आत्मिक उन्नति नहीं हो सक