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Gita / Chapter 13.4
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत् | स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु

Transliteration

tatkṣetraṃ yacca yādṛkca yadvikāri yataśca yat . sa ca yo yatprabhāvaśca tatsamāsena me śṛṇu

English

Hear from Me in brief about (all) that as to what that field is and how it is; what its changes are, and from what cause arises what effect; and who He is, and what His powers are.

Hindi

इसलिये, वह क्षेत्र जो है और जैसा है तथा जिन विकारों वाला है, और जिस (कारण) से जो (कार्य) हुआ है तथा वह (क्षेत्रज्ञ) भी जो है और जिस प्रभाव वाला है, वह संक्षेप में मुझसे सुनो।।

Sanskrit
English
तत्
that
क्षेत्रम्
field
यत्
which
च
and
यादृक्
what like
च
and
यद्विकारि
what its modifications
यतः
whence
च
and
यत्
what
सः
He
च
and
यः
who
यत्प्रभावः
what His powers
च
and
तत्
that
समासेन
in brief
मे
from Me
श्रृणु
hear.
Hindi

भगवान् श्रीकृष्ण न केवल क्षेत्र की वस्तुओं का उल्लेख ही करेंगे? वरन् क्षेत्र के गुण धर्म? उसके विकार तथा कौन से कारण से ऋ़ौन सा कार्य उत्पन्न हुआ है? इसका भी वर्णन करेंगे। उसी प्रकार? क्षेत्रज्ञ का स्वरूप तथा उपाधियों से सम्बद्ध उसके प्रभाव को भी इस अध्याय में बतायेंगे। ये सब? मुझसे संक्षेप में सुनो।अनन्त आत्मा के स्वरूप को दर्शाने वाले विशेषणों को पुन दोहराने मात्र से अथवा उस पर विशेष बल देकर कहने से एक निष्ठावान् साधक को कोई विशेष लाभ भी नहीं होता और न उसके विकास में कोई सहायता मिलती