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Gita / Chapter 14.1
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

श्रीभगवानुवाच | परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् | यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः

Transliteration

śrībhagavānuvāca . paraṃ bhūyaḥ pravakṣyāmi jñānānāṃ jñānamuttamam . yajjñātvā munayaḥ sarve parāṃ siddhimito gatāḥ

English

The Blessed Lord said I shall speak again of the supreme Knowledge, the best of all knowledges, by realizing which all the contemplatives reached the highest Perfection from here.

Hindi

श्री भगवान् ने कहा — समस्त ज्ञानों में उत्तम परम ज्ञान को मैं पुन: कहूंगा, जिसको जानकर सभी मुनिजन इस (लोक) से जाकर (इस जीवनोपरान्त) परम सिद्धि को प्राप्त हुए हैं।।

Sanskrit
English
परम्
supreme
भूयः
again
प्रवक्ष्यामि (I)
will declare
ज्ञानानाम्
of all knowledge
ज्ञानम्
knowledge
उत्तमम्
the best
यत्
which
ज्ञात्वा
having known
मुनयः
the sages
सर्वे
all
पराम्
supreme
सिद्धिम्
to perfection
इतः
after this life
गताः
gone.
Hindi

किसी भयंकर मनोवेग से विक्षुब्ध होने पर एक अत्यन्त बुद्धिमान पुरुष को भी बारम्बार सांत्वना की आवश्यकता होती है। जीवभाव को प्राप्त पुरुष अपने जीवन के दुखों के कारण उपदेश के पश्चात भी अपने सच्चिदानन्द स्वरूप को सरलता से नहीं ग्रहण कर पाता। इसलिए? जब तक शिष्यों की विद्रोही बुद्धि इस तत्त्व को समझ नहीं लेती? तब तक आचार्यों को इन आध्यात्मिक सत्यों का बारंबार पुनरावृत्ति करना आवश्यक हो जाता है। अपने छोटेसे शिशु को भोजन करा रही माता इसका आदर्श उदाहरण है। जब तक वह शिशु पर्याप्त मात्रा में भोजन न