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Gita / Chapter 14.10
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा

Transliteration

rajastamaścābhibhūya sattvaṃ bhavati bhārata . rajaḥ sattvaṃ tamaścaiva tamaḥ sattvaṃ rajastathā

English

O scion of the Bharata dynasty, sattva increases by subduing rajas and tamas, rajas by overpowering sattva and tamas, and tamas by dominating over sattva and rajas.

Hindi

हे भारत ! कभी रज और तम को अभिभूत (दबा) करके सत्त्वगुण की वृद्धि होती है, कभी रज और सत्त्व को दबाकर तमोगुण की वृद्धि होती है, तो कभी तम और सत्त्व को अभिभूत कर रजोगुण की वृद्धि होती है।।

Sanskrit
English
रजः
Rajas
तमः
inertia
च
and
अभिभूय
having overpowered
सत्त्वम्
Sattva
भवति
arises
भारत
O Arjuna
रजः
Rajas
सत्त्वम्
Sattva
तमः
inertia
च
and
एव
even
तमः
inertia
सत्त्वम्
purity
रजः
active force
तथा
also.
Hindi

पूर्वोक्त विवेचन के सन्दर्भ में एक बुद्धिमान् साधक की यह जिज्ञासा होगी कि क्या ये तीन गुण अपना कार्य भिन्नभिन्न समय पर किसी क्रम विशेष में अथवा एक ही समय में सब कार्य करते हैं। यदि एक ही साथ तीनों कार्य करते हैं? तो क्या इनमें सामंजस्य होता है या विरोध इस प्रकार के प्रश्न का पूर्वानुमान करके भगवान् श्रीकृष्ण अपने दिव्यगान के इस श्लोक में इसका उत्तर देते हैं। वे वर्णन करते हैं कि किस प्रकार ये गुण भिन्नभिन्न समय पर कार्य करते हैं। प्रत्येक गुण उस क्षणविशेष तक प्रमुख और शक्तिशाली बन जात