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Gita / Chapter 14.16
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् | रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम्

Transliteration

karmaṇaḥ sukṛtasyāhuḥ sāttvikaṃ nirmalaṃ phalam . rajasastu phalaṃ duḥkhamajñānaṃ tamasaḥ phalam

English

They say that the result of good work is pure and is born of sattva. But the result of rajas is sorrow; the result of tamas is ignorance.

Hindi

शुभ कर्म का फल सात्विक और निर्मल कहा गया है; रजोगुण का फल दु;ख और तमोगुण का फल अज्ञान है।।

Sanskrit
English
कर्मणः
of action
सुकृतस्य (of)
good
आहुः (they)
say
सात्त्विकम्
Sattvic
निर्मलम्
pure
फलम्
the fruit
रजसः
of Rajas
तु
verily
फलम्
the fruit
दुःखम्
pain
अज्ञानम्
ignorance
तमसः
of inertia
फलम्
the fruit.
Hindi

इस श्लोक में संभाषण कुशल भगवान् श्रीकृष्ण पूर्व के श्लोकों में कथित विषय को ही साररूप से वर्णन करते हैं। प्रत्येक गुण के प्रवृद्ध होने पर जो फल प्राप्त होते हैं उनका निर्देश यहाँ एक ही स्थान पर किया गया है।शुभ कर्मों का फल सात्विक और निर्मल कहा गया है। सावधानीपूर्वक अध्ययन करने पर हमें ज्ञात होगा कि अन्तकरण का विचार ही समस्त कर्मों का जनक है विचार बोये गये बीज हैं? तो कर्म हैं अर्जित की गयी उपज। घासपात के बीजों से मात्र घास ही उत्पन्न होगी वैसे ही अशुभ संकल्पों से अशुभ कर्म ही होंगे। ब