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Gita / Chapter 16.11
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः | कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः

Transliteration

cintāmaparimeyāṃ ca pralayāntāmupāśritāḥ . kāmopabhogaparamā etāvaditi niścitāḥ

English

Beset with innumerable cares which end (only) with death, holding that the enjoyment of desirable objects is the highest goal, feeling sure that this is all.

Hindi

मरणपर्यन्त रहने वाली अपरिमित चिन्ताओं से ग्रस्त और विषयोपभोग को ही परम लक्ष्य मानने वाले ये आसुरी लोग इस निश्चित मत के होते हैं कि “इतना ही (सत्य, आनन्द) है”।।

Sanskrit
English
चिन्ताम्
cares
अपरिमेयाम्
immeasurable
च
and
प्रलयान्तम्
ending only with death
उपाश्रिताः
refuged in
कामोपभोगपरमाः
regarding gratification of lust as their highest aim
एतावत्
that is all
इति
thus
निश्चिताः
feeling sure.
Hindi

चिन्ता और व्याकुलता से ग्रस्त ये हतोत्साहित लोग अपने निरर्थक उद्यमों के जीवन को दुख के गलियारे से खींचते हुए मृत्यु के आंगन में ले आते हैं। सामान्य जीवन में? ये चिन्ताएं शान्ति और आनन्द के दुर्ग पर टूट पड़ती हैं और विशेष रूप से तब? जब शक्तिशाली कामनाओं ने मनुष्य को जीतकर अपने वश में कर लिया होता है। अपनी इष्ट वस्तुओं को प्राप्त करने (योग) के लिए परिश्रम और संघर्ष तथा प्राप्त की गयी वस्तुओं के रक्षण (क्षेम) की व्याकुलता? यही मनुष्य जीवन की चिन्ताएं होती हैं। जीवन पर्यन्त की कालावधि केवल