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Gita / Chapter 17.15
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् | स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते

Transliteration

anudvegakaraṃ vākyaṃ satyaṃ priyahitaṃ ca yat . svādhyāyābhyasanaṃ caiva vāṅmayaṃ tapa ucyate

English

That speech which causes no pain, which is true, agreeable and beneficial; as well as the practice of study of the scriptures,-is said to be austerity of speech.

Hindi

जो वाक्य (भाषण) उद्वेग उत्पन्न करने वाला नहीं है, जो प्रिय, हितकारक और सत्य है तथा वेदों का स्वाध्याय अभ्यास वाङ्मय (वाणी का) तप कहलाता है।।

Sanskrit
English
अनुद्वेगकरम्
causing no excitement
वाक्यम्
speech
सत्यम्
truthful
प्रियहितम्
pleasant and beneficial
च
and
यत्
which
स्वाध्यायाभ्यसनम्
the practice of the study of the Vedas
च
and
एव
also
वाङ्मयम्
of speech
तपः
austerity
उच्यते
is called.
Hindi

मनुष्य के पास स्वयं को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है वाणी। इस वाणी के द्वारा वक्ता की बौद्धिक पात्रता? मानसिक शिष्टता एवं शारीरिक संयम प्रकट होते हैं। यदि वक्ता अपने व्यक्तित्व के इन सभी स्तरों पर सुगठित न हो? तो उसकी वाणी में कोई शक्ति? कोई चमत्कृति नहीं होती। वाणी एक कर्मेन्द्रिय है? जिसके सतत क्रियाशील रहने से मनुष्य की शक्ति का सर्वाधिक व्यय होता है। अत वाणी के संयम के द्वारा बहुत बड़ी मात्रा में शक्ति का संचय किया जा सकता है? जिसका सदुपयोग हम अपनी साधना में कर सकते हैं।इसका