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Gita / Chapter 17.3
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सत्त्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत | श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः

Transliteration

sattvānurūpā sarvasya śraddhā bhavati bhārata . śraddhāmayo.ayaṃ puruṣo yo yacchraddhaḥ sa eva saḥ

English

O scion of the Bharata dynasty, the faith of all beings is in accordance with their minds. This person is made up of faith as the dominant factor. He is verily what his faith is.

Hindi

हे भारत सभी मनुष्यों की श्रद्धा उनके सत्त्व (स्वभाव, संस्कार) के अनुरूप होती है। यह पुरुष श्रद्धामय है, इसलिए जो पुरुष जिस श्रद्धा वाला है वह स्वयं भी वही है अर्थात् जैसी जिसकी श्रद्धा वैसा ही उसका स्वरूप होता है।।

Sanskrit
English
सत्त्वानुरूपा
in accordance with his nature
सर्वस्य
of each
श्रद्धा
faith
भवति
is
भारत
O Arjuna
श्रद्धामयः
consists of (his) faith
अयम्
this
पुरुषः
man
यः
who
यच्छ्रद्धः
in which his faith is
सः
he
एव
verily
सः
that (is).
Hindi

सत्त्वानुरूप श्रद्धा हम जगत् में देखते हैं कि प्रत्येक मनुष्य के व्यक्तित्व की पोषक श्रद्धा भिन्नभिन्न प्रकार की होती है। जितनी अधिक भिन्नता इस श्रद्धा में देखी जाती है? उसके कारण को जानने की हमारी जिज्ञासा भी उतनी ही बढ़ती जाती है। भगवान् यहाँ कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की श्रद्धा उसके स्वभाव अर्थात् संस्कारों के अनुरूप होती है। निश्चितरूप से यह कह पाना कठिन है कि श्रद्धा हमारे स्वभाव को निर्धारित करती है अथवा हमारा स्वभाव श्रद्धा का निर्धारणकर्ता है। इन दोनों में अन्योन्याश्रय है।त