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Gita / Chapter 18.15
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नरः | न्याय्यं वा विपरीतं वा पञ्चैते तस्य हेतवः

Transliteration

śarīravāṅmanobhiryatkarma prārabhate naraḥ . nyāyyaṃ vā viparītaṃ vā pañcaite tasya hetavaḥ

English

Whatever action a man performs with the body, speech and mind, be it just or its reverse, of it these five are the cuases.

Hindi

मनुष्य अपने शरीर, वाणी और मन से जो कोई न्याय्य (उचित) या विपरीत (अनुचित) कर्म करता है, उसके ये पाँच कारण ही हैं।।

Sanskrit
English
शरीरवाङ्मनोभिः
by (his) body
speech
and mind
यत्
whatever
कर्म
action
प्रारभते
performs
नरः
man
न्याय्यम्
right
वा
or
विपरीतम्
the reverse
वा
or
पञ्च
five
एते
these
तस्य
its
हेतवः
causes.
Hindi

न्याय्य और विपरीत कर्मों से तात्पर्य क्रमश धर्म के अनुकूल और प्रतिकूल कर्मों से है। निरपवाद रूप से सब प्रकार कर्मों की सिद्धि के लिए शरीरादि पाँच कारणों की आवश्यकता होती है।यहाँ विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि कर्मों के पञ्चविध कारणों का वर्णन केवल बोनट के नीचे स्थित इंजन का ही है? पेट्रोल का नहीं। पेट्रोल के बिना इंजन कार्य नहीं कर सकता और न ही केवल पेट्रोल के द्वारा यात्रा सफल और सुखद हो सकती है। इंजन और पेट्रोल के सम्बन्ध से वाहन में गति आती है और तब स्वामी की इच्छा के अनुसार चा