Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 18.20
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते | अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्

Transliteration

sarvabhūteṣu yenaikaṃ bhāvamavyayamīkṣate . avibhaktaṃ vibhakteṣu tajjñānaṃ viddhi sāttvikam

English

Know that knowledge to be originating from sattva through which one sees a single, undecaying, undivided Entity in all the diversified things.

Hindi

जिस ज्ञान से मनुष्य, विभक्त रूप में स्थित समस्त भूतों में एक अविभक्त और अविनाशी (अव्यय) स्वरूप को देखता है, उस ज्ञान को तुम सात्त्विक जानो।।

Sanskrit
English
सर्वभूतेषु
in all beings
येन
by which
एकम्
one
भावम्
reality
अव्ययम्
indestructible
ईक्षते (one)
sees
अविभक्तम्
inseparable
विभक्तेषु
in the separated
तत्
that
ज्ञानम्
knowledge
विद्धि
know
सात्त्विकम्
Sattvic (pure).
Hindi

प्रस्तुत प्रकरण में ज्ञान? कर्म और कर्ता का जो त्रिविध वर्गीकरण किया जा रहा है? उसका उद्देश्य अन्य लोगों के गुणदोष को देखकर उनका वर्गीकरण करने का नहीं है। यह तो साधक के अपने आत्मनिरीक्षण के लिए है। आत्मविकास के इच्छुक साधक को यथासंभव सत्त्वगुण में निष्ठा प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। आत्मनिरीक्षण के द्वारा हम अपने अवगुणों को समझकर उनका तत्काल निराकरण कर सकते हैं।सात्त्विक ज्ञान के द्वारा हम भूतमात्र में स्थित एक अव्यय सत्य को देख सकते हैं। यद्यपि उपाधियाँ असंख्य हैं? तथापि उनका स