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Gita / Chapter 18.50
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे | समासेनैव कौन्तेय निष्ठा ज्ञानस्य या परा

Transliteration

siddhiṃ prāpto yathā brahma tathāpnoti nibodha me . samāsenaiva kaunteya niṣṭhā jñānasya yā parā

English

Understand for certain from Me, in brief indeed, O son of Kunti, that process by which one who has achieved success attains Brahman, which is the supreme consummation of Knowledge.

Hindi

सिद्धि को प्राप्त पुरुष किस प्रकार ब्रह्म को प्राप्त होता है, तथा ज्ञान की परा निष्ठा को भी तुम मुझसे संक्षेप में जानो।।

Sanskrit
English
सिद्धिम्
perfection
प्राप्तः
attained
यथा
as
ब्रह्म
Brahman (the Eternal)
तथा
so
आप्नोति
obtains
निबोध
learn
मे
of Me
समासेन
in brief
एव
even
कौन्तेय
O son of Kunti
निष्ठा
state
ज्ञानस्य
of knowledge
या
or
परा
highest.
Hindi

पूर्व श्लोक में नैर्ष्कम्य सिद्धि के लक्ष्य को इंगित किया गया है। अब उस साधना के विवेचन का प्रकरण प्रारम्भ होता है? जिसके अभ्यास से परमात्मस्वरूप में दृढ़निष्ठा प्राप्त हो सकती है। इस श्लोक में आगे के कथनीय विषय की प्रस्तावना की गयी है। सिद्धि को प्राप्त पुरुष से तात्पर्य उस साधक से है? जिसने स्वधर्माचरण से अन्तकरण की शुद्धि प्राप्त कर ली है। ऐसा ही साधक ब्रह्मप्राप्ति का अधिकारी होता है। आगे के कुछ श्लोक हमें स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षणों का स्मरण कराते हैं? जिनका वर्णन गीता के द्वितीय