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Gita / Chapter 18.69
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः | भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि

Transliteration

na ca tasmānmanuṣyeṣu kaścinme priyakṛttamaḥ . bhavitā na ca me tasmādanyaḥ priyataro bhuvi

English

And as compared with him, none else among human beings is the best accomplisher of what is dear to Me. Moreover, nor will there be anyone else in the world dearer to Me than he.

Hindi

न तो उससे बढ़कर मेरा अतिशय प्रिय कार्य करने वाला मनुष्यों में कोई है और न उससे बढ़कर मेरा प्रिय इस पृथ्वी पर दूसरा कोई होगा।।

Sanskrit
English
न
not
च
and
तस्मात्
than he
मनुष्येषु
among men
कश्चित्
any
मे
of Me
प्रियकृत्तमः
one who does dearer service
भविता
shall be
न
not
च
and
मे
of Me
तस्मात्
than he
अन्यः
another
प्रियतरः
dearer
भुवि
on the earth.
Hindi

यह भी आचार्य की स्तुति है। यहाँ भगवान् बताते हैं कि किस प्रकार ऐसा श्रेष्ठ आचार्य भगवत्स्वरूप को प्राप्त होता है। गीताचार्य भगवान् श्रीकृष्ण विशेष बल देकर कहते हैं? उसके तुल्य इस जगत् में मेरा अतिशय प्रिय कार्य करने वाला और कोई नहीं है। केवल इतना ही नहीं? अपितु भविष्य में भी? उससे अधिक मेरा प्रिय इस पृथ्वी पर कोई न होगा।सम्पूर्ण गीता? में अनेक स्थानों पर इस मनोवैज्ञानिक सत्य को दोहराया गया है कि ध्येयवस्तु से भिन्न समस्त वृत्तियों का परित्याग करके यदि कोई साधक अपने मन को ध्येयवस्तु में