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Gita / Chapter 2.38
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ | ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि

Transliteration

sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau . tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi

English

Treating happiness and sorrow, gain and loss, and conest and defeat with eanimity, then engage in battle. Thus you will not incur sin.

Hindi

सुख-दु:ख,  लाभ-हानि और जय-पराजय को समान करके युद्ध के लिये तैयार हो जाओ;  इस प्रकार तुमको पाप नहीं होगा।।

Sanskrit
English
सुखदुःखे
pleasure and pain
समे
same
कृत्वा
having made
लाभालाभौ
gain and loss
जयाजयौ
victory and defeat
ततः
then
युद्धाय
for battle
युज्यस्व
engage thou
न
not
एवम्
thus
पापम्
sin
अवाप्स्यसि
shalt incur.
Hindi

सम्पूर्ण गीता के साररूप इस द्वितीय अध्याय में सांख्ययोग के पश्चात् इस श्लोक में कर्मयोग का दिशा निर्देश है। इसी अध्याय में आगे भक्तियोग का भी संक्षेप में संकेत किया गया है।यह प्रथम अवसर है जब श्रीकृष्ण इस श्लोक में आत्मोन्नति की साधना का स्पष्टरूप से वर्णन करते हैं। इसलिये इसका सावधानीपूर्वक अध्ययन गीता के समस्त साधकों के लिये अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा।शरीर मन और बुद्धि इन तीन उपाधियों के माध्यम से ही हम जीवन में विभिन्न अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इन तीन स्तरों पर प्राप्त होने वाले सभी