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Gita / Chapter 2.40
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते | स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्

Transliteration

nehābhikramanāśo.asti pratyavāyo na vidyate . svalpamapyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt

English

Here there is no waste of an attempt; nor is there (any) harm. Even a little of this righteousness saves (one) from great fear.

Hindi

इसमें क्रमनाश और प्रत्यवाय दोष नहीं है। इस धर्म (योग) का अल्प अभ्यास भी महान् भय से रक्षण करता है।।

Sanskrit
English
न
not
इह
in this
अभिक्रमनाशः
loss of effort
अस्ति
is
प्रत्यवायः
production of contrary results
न
not
विद्यते
is
स्वल्पम्
very little
अपि
even
अस्य
of this
धर्मस्य
duty
त्रायते
protects
महतः (from)
great
भयात्
fear.
Hindi

क्रमनाश जिस प्रकार कृषि क्षेत्र में फसल पाने के लिये भूमि जोतना सींचना बीज बोना निराई सुरक्षा और कटाई आदि क्रम का पालन करना पड़ता है अन्यथा हानि उठानी पड़ती है उसी प्रकार वेदों के कर्मकाण्ड में वर्णित यज्ञयागादि के अनुष्ठान में भी क्रमानुसार क्रिया विधि न करने पर यज्ञ का फल नहीं मिलता। इतना ही नहीं यदि वेद प्रतिपादित कर्मों को न किया जाय तो वह प्रत्यवाय दोष कहलाता है जिसका अनिष्ट फल कर्त्ता (जीव)को भोगना पड़ता है। लौकिक फल प्राप्ति में यही बातें देखी जाती हैं। भौतिक जगत् में भी इसी प्र