Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 2.46
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके | तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः

Transliteration

yāvānartha udapāne sarvataḥ samplutodake . tāvānsarveṣu vedeṣu brāhmaṇasya vijānataḥ

English

A Brahmana with realization has that much utility in all the Vedas as a man has in a well when there is a flood all around.

Hindi

सब ओर से परिपूर्ण जलराशि के होने पर मनुष्य का छोटे जलाशय में जितना प्रयोजन रहता है? आत्मज्ञानी ब्राह्मण का सभी वेदों में उतना ही प्रयोजन रहता है।।

Sanskrit
English
यावान्
as much
अर्थः
use
उदपाने
in a reservoir
सर्वतः
everywhere
संप्लुतोदके
being flooded
तावान्,so
much (use)
सर्वेषु
in all
वेदेषु
in the Vedas
ब्राह्मणस्य
of the Brahmana
विजानतः
of the knowing.
Hindi

जलराशि का जो सुन्दर दृष्टान्त यहाँ दिया गया है वह सन्दर्भ को देखते हुये अत्यन्त समीचीन है। भीषण गर्मियों के दिनों में सरिताओं के सूख जाने पर समीप के किसी कुएँ से ही जल लेने लोगों को जाना पड़ता है। यद्यपि पैरों के नीचे पृथ्वी के गर्भ में जल स्रोत रहता है परन्तु वह उपयोग के लिये उपलब्ध नहीं होता। वर्षा ऋतु में सर्वत्र नदियों में बाढ़ आने पर छोटेछोटे जलाशय उसी में समा जाते हैं और तब उनका अलग से न अस्तित्व होता है और न प्रयोजन।उसी प्रकार जब तक मनुष्य अपने आनन्दस्वरूप को पहचानता नहीं तब तक