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Gita / Chapter 2.50
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते | तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्

Transliteration

buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte . tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam

English

Possessed of wisdom, one rejects here both virtue and vice. Therefore devote yourself to (Karma-) yoga. Yoga is skilfulness in action.

Hindi

समत्वबुद्धि युक्त पुरुष यहां (इस जीवन में) पुण्य और पाप इन दोनों कर्मों को त्याग देता है? इसलिये तुम योग से युक्त हो जाओ। कर्मों में कुशलता योग है।।

Sanskrit
English
बुद्धियुक्तः
endowed with wisdom
जहाति
casts off
इह
in this life
उभे
both
सुकृतदुष्कृते
good and evil deeds
तस्मात्
therefore
योगाय
to Yoga
युज्यस्व
devote thyself
योगः
Yoga
कर्मसु
in actions
कौशलम्
skill.
Hindi

भावनाओं की दुर्बलताओं से ऊपर उठकर जो पुरुष समत्व बुद्धियुक्त हो जाता है वह पाप और पुण्य दोनों के बन्धनों से मुक्त हो जाता है। पाप और पुण्य मन की धारणायें हैं और उनकी प्रतिक्रियाएँ मन पर वासनाओं के रूप में अंकित होती हैं। मनरूपी विक्षुब्ध समुद्र के साथ जो व्यक्ति तादात्म्य नहीं करता वह वासनाओं की ऊँचीऊँची तरंगों के द्वारा न तो ऊपर फेंका जायेगा और न नीचे ही डुबोया जायेगा। यहाँ वर्णित मन का बुद्धि के साथ युक्त होना ही बुद्धियुक्त शब्द का अर्थ है।इस सम्पूर्ण प्रकरण में गीता का मानव मात्र को