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Gita / Chapter 2.53
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला | समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि

Transliteration

śrutivipratipannā te yadā sthāsyati niścalā . samādhāvacalā buddhistadā yogamavāpsyasi

English

When your mind that has become bewildered by hearing [S. takes the word sruti in the sense of the Vedas.-Tr.] will become unshakable and steadfast in the Self, then you will attain Yoga that arises from discrimination.

Hindi

जब अनेक प्रकार के विषयों को सुनने से विचलित हुई तुम्हारी बुद्धि आत्मस्वरूप में अचल और स्थिर हो जायेगी तब तुम (परमार्थ) योग को प्राप्त करोगे।।

Sanskrit
English
श्रुतिविप्रतिपन्ना
perplexed by what hast heard
ते
thy
यदा
when
स्थास्यति
shall stand
निश्चला
immovable
समाधौ
in the Self
अचला
steady
बुद्धिः
intellect
तदा
then
योगम्
Selfrealisation
अवाप्स्यसि (thou)
shalt attain.
Hindi

जब पाँचो ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा विषयों को ग्रहण करने पर भी जिसकी बुद्धि अविचलित रहती है तब उसे योग में स्थित समझा जाता है। सामान्यत इन्द्रियों के विषय ग्रहण के कारण मन में अनेक विक्षेप उठते हैं। योगस्थ पुरुष का मन इन सबमें निश्चल रहता है। उसके विषय में आगे स्थितप्रज्ञ के लक्षण और अधिक विस्तार से बताते हैं।अनेक व्याख्याकार इसका अर्थ इस प्रकार करते हैं कि विभिन्न दार्शनिकों के परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाले सिद्धान्तों को सुनकर जिसकी बुद्धि विचलित नहीं होती वह योग में स्थित हुआ समझा जा