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Gita / Chapter 2.59
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः | रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते

Transliteration

viṣayā vinivartante nirāhārasya dehinaḥ . rasavarjaṃ raso.apyasya paraṃ dṛṣṭvā nivartate

English

The objects recede from an abstinent man, with the exception of the taste (for them). Even the taste of this person falls away after realization the Absolute.

Hindi

निराहारी देही पुरुष से विषय तो निवृत्त (दूर) हो जाते हैं? परन्तु (उनके प्रति) राग नहीं परम तत्व को देखने पर इस (पुरुष) का राग भी निवृत्त हो जाता है।।

Sanskrit
English
विषयाः
the objects of senses
विनिवर्तन्ते
turn away
निराहारस्य
abstinent
देहिनः
of the man
रसवर्जम्
leaving the longing
रसः
loving (taste)
अपि
even
अस्य
of his
परम्
the Supreme
दृष्ट्वा
having seen
निवर्तते
turns away.
Hindi

प्रत्याहार या उपरति की क्षमता के बिना कभी कोई व्यक्ति किसी रोग के कारण या क्षणिक दुख के आवेग में अथवा व्रत आदि कारणों से विषय उपभोग को छोड़ देता है। उस समय ऐसा प्रतीत होता है कि विषयों से वैराग्य अथवा द्वेष हो गया है किन्तु उनके प्रति मन में स्थित राग केवल कुछ समय के लिये अव्यक्त अवस्था में रहता है। अर्जुन के मन में शंका उत्पन्न होती है कि संभवत योगी का इन्द्रिय संयम भी क्षणिक अनित्य ही हो जो अनुकूल या प्रलोभनपूर्ण परिस्थितियों में टूट जाता हो। उसकी इस शंका का निवारण यहाँ किया गया है।यद