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Gita / Chapter 2.68
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः | इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता

Transliteration

tasmādyasya mahābāho nigṛhītāni sarvaśaḥ . indriyāṇīndriyārthebhyastasya prajñā pratiṣṭhitā

English

Therefore, O mighty-armed one, this wisdom becomes established whose organs in all their varieties are withdrawn from their objects.

Hindi

इसलिये? हे महाबाहो जिस पुरुष की इन्द्रियाँ सब प्रकार इन्द्रियों के विषयों के वश में की हुई होती हैं? उसकी बुद्धि स्थिर होती है।।

Sanskrit
English
तस्मात्
therefore
यस्य
whose
महाबाहो
O mightyarmed
निगृहीतानि
restrained
सर्वशः
completely
इन्द्रियाणि
the senses
इन्द्रियार्थेभ्यः
from the senseobjects
तस्य
his
प्रज्ञा
knowledge
प्रतिष्ठिता
is steady.
Hindi

किसी सिद्धांत को समझाते समय पर्याप्त तर्क प्रस्तुत किये बिना हम अन्तिम निष्कर्ष को प्रकट नहीं करते चाहे वह निष्कर्ष कितना ही स्वीकार करने योग्य क्यों न हो। इसी को ध्यान में रखते हुए श्रीकृष्ण अर्जुन को आवश्यक तर्क देने के बाद इस श्लोक में इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि केवल अश्रु विलाप और शोक के अतिरिक्त किसी उच्चतर वस्तु की अपेक्षा यदि हम जीवन में करते हैं तो संयमपूर्ण जीवन ही जीने योग्य है। इन्द्रियों के विषयों से जिसकी इन्द्रियाँ पूर्णत वश में होती हैं वही पुरुष वास्तव में स्थितप्रज्ञ