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Gita / Chapter 3.10
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः | अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक्

Transliteration

sahayajñāḥ prajāḥ sṛṣṭvā purovāca prajāpatiḥ . anena prasaviṣyadhvameṣa vo.astviṣṭakāmadhuk

English

In the days of yore, having created the beings together with the sacrifices, Prajapati said: ‘By this you multiply. Let this be your yielder of coveted objects of desire.’

Hindi

प्रजापति (सृष्टिकर्त्ता) ने (सृष्टि के) आदि में यज्ञ सहित प्रजा का निर्माण कर कहा इस यज्ञ द्वारा तुम वृद्धि को प्राप्त हो और यह यज्ञ तुम्हारे लिये इच्छित कामनाओं को पूर्ण करने वाला (इष्टकामधुक्) होवे।।

Sanskrit
English
सहयज्ञाः
together with sacrifice
प्रजाः
mankind
सृष्ट्वा
having created
पुरा
in the beginning
उवाच
said
प्रजापतिः
Prajapati
अनेन
by this
प्रसविष्यध्वम्
shall ye propagate
एषः
this
वः
your
अस्तु
let be
इष्टकामधुक्
milch cow of desires.
Hindi

स्वयं सृष्टिकर्त्ता प्रजापति पंचमहाभूतों की सृष्टि रचकर अन्य प्राणियों के साथ मनुष्य को भी कर्म करने और फल पाने के लिये उत्पन्न करते हैं। उस समय वे यज्ञ को भी बनाते हैं अर्थात् उसका उपदेश देते हैं। यज्ञ का अर्थ है समर्पण बुद्धि और सेवा भाव से किये हुये कर्म। प्रकृति में सर्वत्र यज्ञ की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। सूर्य प्रकाशित होता है और चन्द्रमा प्रगट होता है समुद्र स्पन्दित होता है पृथ्वी प्राणियों को धारण करती है ये सब मातृभाव से तथा यज्ञ की भावना से कर्म करते हैं जिनमें रंचमात्र भी