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Gita / Chapter 3.23
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः | मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः

Transliteration

yadi hyahaṃ na varteyaṃ jātu karmaṇyatandritaḥ . mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ

English

For, O Partha, if at any time I do not continue [Ast. and A.A. read varteya instead of varteyam.-Tr.] vigilantly in action, men will follow My path in ever way.

Hindi

यदि मैं सावधान हुआ (अतन्द्रित:) कदाचित कर्म में न लगा रहूँ तो, हे पार्थ ! सब प्रकार से मनुष्य मेरे मार्ग (र्वत्म) का अनुसरण करेंगे।।

Sanskrit
English
यदि
if
हि
surely
अहम्
I
न
not
वर्तेयम्
engage Myself in action
जातु
ever
कर्मणि
in action
अतन्द्रितः
unwearied
मम
My
वर्त्म
path
अनुवर्तन्ते
follow
मनुष्याः
men
पार्थ
O Partha
सर्वशः
in every way.
Hindi

भगवान् को कर्म क्यों करने चाहिये उनके कर्म न करने से समाज को क्या हानि होगी यह वस्तुस्थिति है कि सामान्य जन सदैव अपने नेता का अनुकरण उसकी वेषभूषा नैतिक मूल्य कर्म और सभी क्षेत्रों में उसके व्यवहार के अनुसार करते हैं। नेताओं का जीवन उनके लिये आदर्श मापदण्ड होता है। अत भगवान् के कर्म न करने पर अन्य लोग भी निष्क्रिय होकर अनुत्पादक स्थिति में पड़े रहेंगे। जबकि प्रकृति में निरन्तर क्रियाशीलता दिखाई देती है। सम्पूर्ण विश्व की स्थिति कर्म पर ही आश्रित है।गीता में भगवान् मैं शब्द का प्रयोग दे