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Gita / Chapter 3.36
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अर्जुन उवाच | अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः | अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः

Transliteration

arjuna uvāca . atha kena prayukto.ayaṃ pāpaṃ carati pūruṣaḥ . anicchannapi vārṣṇeya balādiva niyojitaḥ

English

Arjuna said Now then, O scion of the Vrsni dynasty (Krsna), impelled by what does this man commit sin even against his wish, being constrained by force, as it were?

Hindi

अर्जुन ने कहा — हे वार्ष्णेय ! फिर यह पुरुष बलपूर्वक बाध्य किये हुये के समान अनिच्छा होते हुये भी किसके द्वारा प्रेरित होकर पाप का आचरण करता है?

Sanskrit
English
अथ
now
केन
by which
प्रयुक्तः
impelled
अयम्
this
पापम्
sin
चरति
does
पूरुषः
man
अनिच्छन्
not wishing
अपि
even
वार्ष्णेय
O Varshneya
बलात्
by force
इव
as it were
नियोजितः
constrained.
Hindi

धर्मशास्त्रों की परम्परा के अनुसार यहाँ अर्जुन विचाराधीन प्रकरण पर एक निश्चित प्रश्न पूछता है। इस प्रश्न से ही ज्ञात होता है कि अर्जुन अपनी प्रारम्भिक उन्माद् की स्थिति से बहुत कुछ बाहर आ गया था और अब उसने आत्मनिरीक्षण भी प्रारम्भ कर दिया था जिसके फलस्वरूप उसे अपने ही मन में कुछ ऐसे गुण अथवा शक्तियाँ कार्य कर रहीं अनुभव हुईं जो उसके उच्च गुणों की अभिव्यक्ति में बाधक बनकर उनके प्रभाव को ही नष्ट कर रहीं थीं। उसका प्रश्न ऐसे परिचित शब्दों में पूछा गया है कि लगता है मानो आज का कोई विद्यार्थ