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Gita / Chapter 4.14
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा | इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते

Transliteration

na māṃ karmāṇi limpanti na me karmaphale spṛhā . iti māṃ yo.abhijānāti karmabhirna sa badhyate

English

Actions do not taint Me; for Me there is no hankering for the results of actions. One who knows Me thus, does not become bound by actions.

Hindi

कर्म मुझे लिप्त नहीं करते;  न मुझे कर्मफल में स्पृहा है। इस प्रकार मुझे जो जानता है, वह भी कर्मों से नहीं बन्धता है।।

Sanskrit
English
न
not
माम्
Me
कर्माणि
actions
लिम्पन्ति
taint
न
not
मे
to Me
कर्मफले
in the fruit of actions
स्पृहा
desire
इति
thus
माम्
Me
यः
who
अभिजानाति
knows
कर्मभिः
by actions
न
not
सः
he
बध्यते
is bound.
Hindi

नित्य शुद्ध और परिपूर्ण आत्मा को किसी प्रकार की अपूर्णता का भान नहीं हो सकता जो किसी इच्छा को जन्म दे। इस दृष्टि से श्रीकृष्ण भगवान् कहते हैं कर्म मुझे दूषित नहीं कर सकते और न मुझे कर्मफल में कोई आसक्ति ही है। इच्छा अथवा कर्म का बन्धन जीवअहंकार के लिये ही हो सकता है। मन और बुद्धि की उपाधियों से युक्त चैतन्य आत्मा ही जीव कहा जाता है। इन उपाधियों के दोषयुक्त होने पर जीव ही दूषित हुआ समझा जाता है। इसे एक दृष्टान्त के द्वारा हम भली भांति समझ सकेंगे।यदि किसी पात्र में रखे जल में सूर्य प्रतिब