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Gita / Chapter 4.8
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे

Transliteration

paritrāṇāya sādhūnāṃ vināśāya ca duṣkṛtām . dharmasaṃsthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge

English

For the protection of the pious, the destruction of the evil-doers, and establishing virtue, I manifest Myself in every age.

Hindi

साधु पुरुषों के रक्षण,  दुष्कृत्य करने वालों के नाश,  तथा धर्म संस्थापना के लिये,  मैं प्रत्येक युग में प्रगट होता हूँ।।

Sanskrit
English
परित्राणाय
for the protection
साधूनाम्
of the good
विनाशाय
for the destruction
च
and
दुष्कृताम्
of the wicked
धर्मसंस्थापनार्थाय
for the establishment of righteousness
संभवामि (I)
am born
युगे युगे
in every age.
Hindi

यह तो स्पष्ट है कि बिना किसी इच्छा अथवा प्रयोजन के ईश्वर अपने को व्यक्त नहीं करता। इच्छाओं के आत्यन्तिक अभाव का अर्थ है कर्मों का पूर्ण अभाव। बिना किसी साधन के विद्युत् शक्ति किसी विशेष रूप में व्यक्त नहीं हो सकती। इसी प्रकार परमब्रह्म किसी प्रयोजन के अभाव में किसी उत्कृष्ट अथवा निकृष्ट उपाधि को न धारण कर सकता है और न उसे उसकी कोई आवश्यकता ही होती है। जिस प्रकार शान्त और स्थिर जल में किसी वस्तु के डालने पर उसमें तरंगे उठने लगती हैं उसी प्रकार इच्छा रूपी विक्षेपक के होने पर ही परम पूर्ण स