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Gita / Chapter 5.29
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् | सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति

Transliteration

bhoktāraṃ yajñatapasāṃ sarvalokamaheśvaram . suhṛdaṃ sarvabhūtānāṃ jñātvā māṃ śāntimṛcchati

English

One attains Peace by knowing Me who, as the great Lord of all the worlds, am the enjoyer of sacrifices and austerities, (and) who am the friend of all creatures.

Hindi

(साधक भक्त) मुझे यज्ञ और तपों का भोक्ता और सम्पूर्ण लोकों का महान् ईश्वर तथा भूतमात्र का सुहृद् (मित्र) जानकर शान्ति को प्राप्त होता है।।

Sanskrit
English
भोक्तारम्
the enjoyer
यज्ञतपसाम्
of sacrifices and austerities
सर्वलोकमहेश्वरम्
the great Lord of all worlds
सुहृदम्
friend
सर्वभूतानाम्
of all beings
ज्ञात्वा
having known
माम्
Me
शान्तिम्
peace
ऋच्छति
attains.
Hindi

हमको सदैव इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भगवान् श्रीकृष्ण जब कभी स्वयं के लिए मैं शब्द का प्रयोग करते हैं तब उनका अभिप्राय भूतमात्र के हृदय में वास करने वाली आत्मा से होता है और न कि देवकी पुत्र शरीरधारी श्रीकृष्ण से। अहंकार का मूलस्वरूप शुद्ध चैतन्य स्वरूप आत्मा है जो देहादि उपाधियों के साथ तादात्म्य के कारण कर्ता और भोक्ता के रूप में प्रतीत होता है। यज्ञ शब्द का अर्थ पहले भी बताया जा चुका है। गीता के अनुसार किसी भी कार्यक्षेत्र में निस्वार्थ भाव से विश्व कल्याण के लिए अर्पित किया गया क