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Gita / Chapter 6.11
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः | नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्

Transliteration

śucau deśe pratiṣṭhāpya sthiramāsanamātmanaḥ . nātyucchritaṃ nātinīcaṃ cailājinakuśottaram

English

Having firmly established in a clean place his seat, neither too high nor too low, and made of cloth, skin and kusa-grass, placed successively one below the other;

Hindi

शुद्ध (स्वच्छ) भूमि में कुश, मृगशाला और उस पर वस्त्र रखा हो ऐसे अपने आसन को न अति ऊँचा और न अति नीचा स्थिर स्थापित करके….৷৷.।।

Sanskrit
English
शुचौ
in a clean
देशे
spot
प्रतिष्ठाप्य
having established
स्थिरम्
firm
आसनम्
seat
आत्मनः
his own
न
not
अत्युच्छ्रितम्
very high
न
not
अतिनीचम्
very low
चैलाजिनकुशोत्तरम्
a cloth
skin
and Kusagrass
one
over the other.
Hindi

परम शांति एवं समदृष्टि प्राप्त करने का साधन निदिध्यासन है और इसलिए आवश्यक है कि भगवान् यहाँ उस विधि का विस्तृत वर्णन करें। यहाँ कुछ श्लोकों में साधक के लिए आसन साधन एवं ध्यान के फल को बताया गया है।विचाराधीन श्लोक में स्थान एवं आसन का वर्णन है। शुद्ध भूमि में बाह्य वातावरण एवं परिस्थितियों का मनुष्य के मन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इसलिए ध्यानाभ्यास का स्थान स्वच्छ एवं शुद्ध होना चाहिए। मन की शुद्धि में भी वह उपयोगी होता है। व्याख्याकार बताते हैं कि वह स्थान मच्छर मक्खी चींटी खटमल आदि कृम