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Gita / Chapter 6.5
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् | आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः

Transliteration

uddharedātmanātmānaṃ nātmānamavasādayet . ātmaiva hyātmano bandhurātmaiva ripurātmanaḥ

English

One should save oneself by oneself; one should not lower oneself. For oneself is verily one’s onw friend; oneself is verily one’s own enemy.

Hindi

मनुष्य को अपने द्वारा अपना उद्धार करना चाहिये और अपना अध: पतन नहीं करना चाहिये; क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है और आत्मा (मनुष्य स्वयं) ही आत्मा का (अपना) शत्रु है।।

Sanskrit
English
उद्धरेत्
should raise
आत्मना
by the Self
आत्मानम्
the self
न
not
आत्मानम्
the self
अवसादयेत्
let (him) lower
आत्मा
the Self
एव
only
हि
verily
आत्मनः
of the self
बन्धुः
friend
आत्मा
the Self
एव
only
रिपुः
the enemy
आत्मनः
of the self.
Hindi

शास्त्र के रूप में गीता का प्रयोजन सत्य का और केवल सत्य का ही प्रतिपादन करना है। यह बात और है कि किसी काल विशेष में लोगों की धारणाएं कुछ अन्य प्रकार की बन गयीं हों परन्तु सत्य के प्रतिपादन में समाज में प्रचलित मान्यताओं का कोई महत्व नहीं होता। यह प्रचलित मान्यता कि किसी बाह्य स्रोत जैसे ईश्वर की कृपा साधक की निरन्तर सहायता करके उसे साधन मार्ग में आगे बढ़ाती है हानिकारक नहीं है परन्तु इस मान्यता के साथ ही स्वयं का पुरुषार्थ भी होना पूर्ण सफलता के लिये आवश्यक है। मनुष्य को आत्मोद्धार अपने