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Gita / Chapter 7.17
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्तिर्विशिष्यते | प्रियो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रियः

Transliteration

teṣāṃ jñānī nityayukta ekabhaktirviśiṣyate . priyo hi jñānino.atyarthamahaṃ sa ca mama priyaḥ

English

Of them, the man of Knowledge, endowed with constant steadfastness and one-pointed devotion, excels. For I am very much dear to the man of Knowledge, and he too is dear to Me.

Hindi

उनमें भी मुझ से नित्ययुक्त, अनन्य भक्ति वाला ज्ञानी श्रेष्ठ है, क्योंकि ज्ञानी को मैं अत्यन्त प्रिय हूँ और वह मुझे अत्यन्त प्रिय है।।

Sanskrit
English
तेषाम्
of them
ज्ञानी
the wise
नित्ययुक्तः
ever steadfast
एकभक्तिः
whose devotion is to the One
विशिष्यते
excels
प्रियः
dear
हि
verily
ज्ञानिनः
of the wise
अत्यर्थम्
exceedingly
अहम्
I
सः
he
च
and
मम
of Me
प्रियः
dear.
Hindi

चतुर्विध भक्तों की परस्पर तुलना करके भगवान् कहते हैं कि जो ज्ञानी भक्त मुझसे नित्ययुक्त है और आत्मस्वरूप के साथ जिसकी अनन्य भक्ति है वह सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि आत्मतत्त्व से भिन्न किसी अन्य विषय में उसका मन विचरण नहीं करता है। जब तक साधक को अपने ध्येय का स्वरूप निश्चित रूप से ज्ञात नहीं होता है तब तक मन की एकाग्रता भी प्राप्त नहीं की जा सकती है। एक भक्ति का अर्थ है साधक के मन में आत्मसाक्षात्कार की ही एक वृत्ति बनी रहना।एक भक्ति को पाने के लिए साधक को अपने मन की विषयाभिमुखी प्रवृत्तियों