Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 7.7
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय | मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव

Transliteration

mattaḥ parataraṃ nānyatkiñcidasti dhanañjaya . mayi sarvamidaṃ protaṃ sūtre maṇigaṇā iva

English

O Dhananjaya, there is nothing else whatsoever higher than Myself. All this is strung on Me like pearls on a string.

Hindi

हे धनंजय ! मुझसे श्रेष्ठ (परे) अन्य किचिन्मात्र वस्तु नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत् सूत्र में मणियों के सदृश मुझमें पिरोया हुआ है।।

Sanskrit
English
मत्तः
than Me
परतरम्
higher
न
not
अन्यत्
other
किञ्चित्
anyone
अस्ति
is
धनञ्जय
O Dhananjaya
मयि
in Me
सर्वम्
all
इदम्
this
प्रोतम्
is strung
सूत्रे
on a string
मणिगणाः
clusters of gems
इव
like.
Hindi

इसके पूर्व के श्लोकों में कथित सिद्धान्त को स्वीकार करने पर हमें जगत् की ओर देखने के दो दृष्टिकोण मिलते हैं। एक है अपर अर्थात् कार्यरूप जगत् की दृष्टि से तथा दूसरा इससे भिन्न है पर अर्थात् कारण की दृष्टि से। जैसे मिट्टी की दृष्टि से उसमें विभिन्न रूप रंग वाले घटों का सर्वथा अभाव होता है वैसे ही चैतन्यस्वरूप पुरुष में न विषयों का स्थूल जगत् है और न विचारों का सूक्ष्म जगत्। मुझसे अन्य किञ्चिन्मात्र वस्तु नहीं है।स्वप्न से जागने पर जाग्रत् पुरुष के लिये स्वप्न जगत् की कोई वस्तु दृष्टिगोचर न