Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 8.27
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन | तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन

Transliteration

naite sṛtī pārtha jānanyogī muhyati kaścana . tasmātsarveṣu kāleṣu yogayukto bhavārjuna

English

O son of Prtha, no yogi [One steadfast in meditation.) whosoever has known these two courses becomes deluded. Therefore, O Arjuna, be you steadfast in yoga at all times.

Hindi

हे पार्थ इन दो मार्गों को (तत्त्व से) जानने वाला कोई भी योगी मोहित नहीं होता। इसलिए, हे अर्जुन ! तुम सब काल में योगयुक्त बनो।।

Sanskrit
English
न
not
एते
these
सृती
two paths
पार्थ
O Partha
जानन्
knowing
योगी
the Yogi
मुह्यति
is deluded
कश्चन
anyone
तस्मात्
therefore
सर्वेषु
in all
कालेषु
times
योगयुक्तः
steadfast in Yoga
भव (be)
thou
अर्जुन
O Arjuna.
Hindi

शुक्लगति और कृष्णगति इन दोनों के ज्ञान का फल यह है कि इनका ज्ञाता योगी पुरुष कभी मोहित नहीं होता है मन में उठने वाली निम्न स्तर की प्रवृत्तियों के कारण धैर्य खोकर वह कभी निराश नहीं होता।भगवान् श्रीकृष्ण ने अब तक पुनरावृत्ति और अपुनरावृत्ति के मार्गों का वर्णन किया और अब इस श्लोक में वे ज्ञान और उसके फल को संग्रहीत करके कहते हैं कि इसलिए हे अर्जुन तुम सब काल में योगी बनो। जिसने अनात्मा से तादात्म्य हटाकर मन को आत्मस्वरूप में एकाग्र करना सीखा हो वह पुरुष योगी है।संक्षेप में इस सम्पूर्ण अ