Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 10.3
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् | असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते

Transliteration

yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaram . asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate

English

He who knows Me-the birthless, the beginningless, and the great Lord of the worlds, he, the undeluded one among mortals, becomes freed from all sins.

Hindi

जो मुझे अजन्मा, अनादि और लोकों के महान् ईश्वर के रूप में जानता है, र्मत्य मनुष्यों में ऐसा संमोहरहित (ज्ञानी) पुरुष सब पापों से मुक्त हो जाता है।।

Sanskrit
English
यः
who
माम्
Me
अजम्
unborn
अनादिम्
beginningless
च
and
वेत्ति
knows
लोकमहेश्वरम्
the great Lord of the worlds
असम्मूढः
undeluded
सः
he
मर्त्येषु
amongst mortals
सर्वपापैः
from all sins
प्रमुच्यते
is liberated.
Hindi

जो मुझे जानता है यह जानना केवल भावना के प्रवाह में अथवा बुद्धि के विचारों से जानना नहीं है? वरन् यह पूर्ण और वास्तविक आत्मानुभूति है? जो आत्मा के साथ घनिष्ठ तादात्म्य के क्षणों में होती है। आत्मा को किसी दृश्य के समान नहीं किन्तु स्वस्वरूप से इस प्रकार जानना है कि वह अजन्मा? अनादि और सर्वलोकमहेश्वर है। जो लोग वेदान्त दर्शन की प्राचीन परम्परा से कुछ परिचित हैं? उनके लिए उपर्युक्त ये तीन विशेषण अत्यन्त सारगर्भित हैं? जबकि उससे अनभिज्ञ लोगों को ये विशेषण निरर्थक ही प्रतीत होंगे। अनात्म जड