Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 10.36
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् | जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम्

Transliteration

dyūtaṃ chalayatāmasmi tejastejasvināmaham . jayo.asmi vyavasāyo.asmi sattvaṃ sattvavatāmaham

English

Of the fraudulent I am the gambling; I am the irresistible ?nd of the mighty. I am excellene, I am effort, I am the sattva ality of those possessed of sattva.

Hindi

मैं छल करने वालों में द्यूत हूँ और तेजस्वियों में तेज हूँ, मैं विजय हूँ; मैं व्यवसाय (उद्यमशीलता) हूँ और सात्विक पुरुषों का सात्विक भाव हूँ।।

Sanskrit
English
द्यूतम्
the gambling
छलयताम्
of the fraudulent
अस्मि (I)
am
तेजः
splendour
तेजस्विनाम्
of the splendid
अहम्
I
जयः
victory
अस्मि (I)
am
व्यवसायः
determination
अस्मि (I)
am
सत्त्वम्
the goodness
सत्त्ववताम्
of the good
अहम्
I.
Hindi

मैं द्यूत हूँ गीता का उपदेश अपने समय के एक क्षत्रिय राजा योद्धा अर्जुन को दिया गया था। इसका उपदेश भगवान् श्रीकृष्ण ने? धर्मप्रचारक के महान् उत्साह के साथ? अर्जुन को उसके अपने ही धर्म का बोध कराने के लिए किया था इसलिए गीता का प्रयत्न हिन्दुओं को ही हिन्दू बनाने का है? उन्हें स्वधर्म का पुनर्बोध कराने का है। यह पुनर्बोध का कार्य तब तक सफलतापूर्वक नहीं किया जा सकता जब तक हमारे धर्मशास्त्रों का मर्म सामान्य जनता को उसकी ही भाषा में समझाया नहीं जाता। यहाँ दिया हुआ उदाहरण अर्जुन को तत्क्षण