Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 11.13
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा | अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा

Transliteration

tatraikasthaṃ jagatkṛtsnaṃ pravibhaktamanekadhā . apaśyaddevadevasya śarīre pāṇḍavastadā

English

At that time, Pandava saw there, in the body of the God of gods, the whole diversely differentiated Universe united in the one (Cosmic form).

Hindi

पाण्डुपुत्र अर्जुन ने उस समय अनेक प्रकार से विभक्त हुए सम्पूर्ण जगत् को देवों के देव श्रीकृष्ण के शरीर में एक स्थान पर स्थित देखा।।

Sanskrit
English
तत्र
there
एकस्थम्
resting in one
जगत्
the universe
कृत्स्नम्
the whole
प्रविभक्तम्
divided
अनेकधा
in many groups
अपश्यत्
saw
देवदेवस्य
of the God of gods
शरीरे
in the body
पाण्डवः
son of Pandu
तदा
then.
Hindi

अर्जुन ने भगवान के उस ईश्वरीय रूप में देखा कि किस प्रकार सम्पूर्ण जगत् अपनी विविधता के साथ लाकर एक स्थान पर स्थित कर दिया गया था। हम देख चुके हैं कि विराट् पुरुष की संकल्पना ऐसे मन के द्वारा देखा गया दृश्य है जो देश और काल के माध्यम में कार्य नहीं कर रहा है अर्थात् देश और काल की कल्पना लोप हो चुकी है।अनेक को एक में देखने का जो दृश्य है? वह उतना इन्द्रियगोचर नहीं है जितना कि बुद्धिग्राह्य है। यह नहीं कि सम्पूर्ण विश्व संकुचित होकर भगवान् श्रीकृष्ण के देह परिमाण का हो गया है। यदि अर्जुन