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Gita / Chapter 13.18
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते | ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्

Transliteration

jyotiṣāmapi tajjyotistamasaḥ paramucyate . jñānaṃ jñeyaṃ jñānagamyaṃ hṛdi sarvasya viṣṭhitam

English

That is the Light even of the lights; It is spoken of as beyond darkness. It is Knowledge, the Knowable, and the Known. It exists specially [A variant reading is dhisthitam.-Tr.] in the hearts of all.

Hindi

(वह ब्रह्म) ज्योतियों की भी ज्योति और (अज्ञान) अन्धकार से परे कहा जाता है। वह ज्ञान (चैतन्यस्वरूप) ज्ञेय और ज्ञान के द्वारा जानने योग्य (ज्ञानगम्य) है। वह सभी के हृदय में स्थित है।।

Sanskrit
English
ज्योतिषाम्
of lights
अपि
even
तत्
That
ज्योतिः
Light
तमसः
from darkness
परम्
beyond
उच्यते
is said (to be)
ज्ञानम्
knowledge
ज्ञेयम्
that which is to be known
ज्ञानगम्यम्
attainable by knowledge
हृदि
in the heart
सर्वस्य
of all
विष्ठितम्
seated.
Hindi

ब्रह्म ही वह एक चैतन्यस्वरूप प्रकाश है? जिसके द्वारा सभी बौद्धिक ज्ञान अन्तर्प्रज्ञा और अनुभव प्रकाशित होते हैं। उसके कारण ही हमें अपने विविध ज्ञानों तथा अनुभवों का बोध या भान होता है? इसलिए उसकी तुलना प्रकाश या ज्योति से की जाती है। केवल हमारे नेत्र के समक्ष होने से ही बाह्य वस्तुओं का हमें दर्शन नहीं हो सकता वरन् किसी बाह्य प्रकाश से उनका प्रकाशित होना भी आवश्यक होता है। इस लौकिक अनुभव को दृष्टान्त स्वरूप मानें? तो यह भी स्वीकार करना होगा कि हमारी आन्तरिक भावनाओं और विचारों को भी प्र