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Gita / Chapter 13.29
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् | न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम्

Transliteration

samaṃ paśyanhi sarvatra samavasthitamīśvaram . na hinastyātmanātmānaṃ tato yāti parāṃ gatim

English

Since by seeing eally God who is present alike everywhere he does not injure the Self by the Self, therefore he attains the supreme Goal.

Hindi

निश्चय ही, वह पुरुष सर्वत्र सम भाव से स्थित परमेश्वर को समान हुआ आत्मा (स्वयं) के द्वारा आत्मा (स्वयं) का नाश नहीं करता है, इससे वह परम गति को प्राप्त होता है।।

Sanskrit
English
समम्
eally
पश्यन्
seeing
हि
indeed
सर्वत्र
everywhere
समवस्थितम्
eally dwelling
ईश्वरम्
the Lord
न
not
हिनस्ति
destroys
आत्मना
by the self
आत्मानम्
the Self
ततः
then
याति
goes
पराम्
the highest
गतिम्
the goal.
Hindi

वेदान्त हमें जगत् से पलायन नहीं सिखाता? बल्कि वह इस दृश्यमान जगत् का पुनर्मूल्यांकन करने का उपदेश देता है। सामान्यत जगत् की ओर देखने की हमारी दृष्टि हमारे प्रिय विचारों एवं भावनाओं से रंजित होती है। स्पष्ट है कि उस स्थिति में हम जगत् को यथार्थ रूप में नहीं देखते। इस अज्ञान की दृष्टि का त्यागकर ज्ञान की दृष्टि से विश्व को देखने का अर्थ वर्तमान काल के सुस्त और उदास? दुखी कुरूप जगत् में ही पूर्णता और आनन्द? दिव्यता और पवित्रता का दर्शन करना है। दुर्व्यवस्थित प्रमाणों के द्वारा परमार्थ सत्