Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 13.30
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः | यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति

Transliteration

prakṛtyaiva ca karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśaḥ . yaḥ paśyati tathātmānamakartāraṃ sa paśyati

English

And he who sees actions as being done in various ways by Nature itself, and also the Self as the non-agent,-he sees.

Hindi

जो पुरुष समस्त कर्मों को सर्वश: प्रकृति द्वारा ही किये गये देखता है तथा आत्मा को अकर्ता देखता है, वही (वास्तव में) देखता है।।

Sanskrit
English
प्रकृत्या
by Nature
एव
alone
च
and
कर्माणि
actions
क्रियमाणानि
being performed
सर्वशः
all
यः
who
पश्यति
sees
तथा
so also
आत्मानम्
the Self
अकर्तारम्
actionless
सः
he
पश्यति
sees.
Hindi

विभिन्न मोटर कम्पनियों के द्वारा निर्मित विभिन्न अश्वशक्ति की असंख्य कारों में से प्रत्येक वाहन का कार्य सम्पादन विशिष्ट होता है। इससे हम यह नहीं कह सकते कि इन कारों में प्रयुक्त पेट्रोल विभिन्न क्षमताओं का है। बल्ब अनेक हैं? परन्तु विद्युत् तो एक ही है। ये दृष्टान्त इस श्लोक में व्यक्त किये गये आत्मैकत्व के सिद्धान्त को भली भाँति स्पष्ट करते हैं।सब कर्म आत्मा की केवल उपस्थिति में प्रकृति से उत्पन्न उपाधियों के द्वारा ही किये जाते हैं। अब विभिन्न व्यक्तियों के कर्मों में जो भेद है? वह