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Gita / Chapter 16.14
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि | ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी

Transliteration

asau mayā hataḥ śatrurhaniṣye cāparānapi . īśvaro.ahamahaṃ bhogī siddho.ahaṃ balavānsukhī

English

‘That enemy has been killed by me, and I shall kill others as well. I am the lord, I am the enjoyer, I am well-established, mighty and happy.’

Hindi

“यह शत्रु मेरे द्वारा मारा गया है और दूसरे शत्रुओं को भी मैं मारूंगा”, “मैं ईश्वर हूँ और भोगी हूँ”, “मैं सिद्ध पुरुष हूँ”, “मैं बलवान और सुखी हूँ”,।।

Sanskrit
English
असौ
that
मया
by me
हतः
slain
शत्रुः
enemy
हनिष्ये (I)
shall slay
च
and
अपरान्
others
अपि
also
ईश्वरः
Lord
अहम्
I
अहम्
I
भोगी
the enjoyer
सिद्धः
perfect
अहम्
I
भोगी
the enjoyer
सिद्धः
perfect
अहम्
I
बलवान्
powerful
सुखी
happy.
Hindi

इस श्लोक का अनुवाद ही इसकी व्याख्या भी है और बहुसंख्यक लोगों के जीवन की भी यही व्याख्या है सारांशत? यह अभिमानी जीव की सफलता का गीत है? जिसे एक नितान्त आसुरी पुरुष अपने मन में सदैव गुनगुनाता रहता है। इस आसुरी लोरी के मादक प्रभाव में? मनुष्य के श्रेष्ठ और दिव्य संस्कार उन्माद की निद्रा में लीन हो जाते हैं।एक भौतिकवादी पुरुष की स्वयं के विषय में क्या धारणा होती है सुनो