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Gita / Chapter 16.15
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया | यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः

Transliteration

āḍhyo.abhijanavānasmi ko.anyo.asti sadṛśo mayā . yakṣye dāsyāmi modiṣya ityajñānavimohitāḥ

English

‘I am rich and high-born; who else is there similar to me? I shall perform sacrifices; I shall give, I shall rejoice,’-thus they are diversely deluded by non-discrimination.

Hindi

“मैं धनवान् और श्रेष्ठकुल में जन्मा हूँ। मेरे समान दूसरा कौन है?”,’मैं यज्ञ करूंगा’, ‘मैं दान दूँगा’, ‘मैं मौज करूँगा’ – इस प्रकार के अज्ञान से वे मोहित होते हैं।।

Sanskrit
English
आढ्यः
rich
अभिजनवान्
wellborn
अस्मि (I)
am
कः
who
अन्यः
else
अस्ति
is
सदृशः
eal
मया
to me
यक्ष्ये (I)
will sacrifice
दास्यामि (I)
will give
मोदिष्ये (I)
will rejoice
इति
thus
अज्ञानविमोहिताः
deluded by ignorance.
Hindi

अज्ञान और उससे उत्पन्न विपरीत ज्ञान से मोहित तथा गर्व और मद से उन्मत्त आसुरी पुरुष जगत् की ओर इसी भ्रामक दृष्टि से देखता है। ऐसी स्थिति में स्वयं का तथा जगत् के साथ अपने संबंध का त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन करना स्वाभाविक ही है। उसे अपने धन? वैभव और कुल का इतना अभिमान होता है कि वह अपने समक्ष सभी को तुच्छ समझता है। स्वयं ही समाज से बहिष्कृत होकर वह मिथ्या अभिमान के महल में रहता है और असंख्य प्रकार की मानसिक यातनाओं का कष्ट भी भोगता रहता है। उसकी महत्त्वाकांक्षा यह होती है कि यज्ञादि के द्वार