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Gita / Chapter 16.19
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तानहं द्विषतः क्रुरान्संसारेषु नराधमान् | क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु

Transliteration

tānahaṃ dviṣataḥ krurānsaṃsāreṣu narādhamān . kṣipāmyajasramaśubhānāsurīṣveva yoniṣu

English

I cast for ever those hateful, cruel, evil-doers in the worlds, the vilest of human beings, verily into the demoniacla classes.

Hindi

ऐसे उन द्वेष करने वाले,  क्रूरकर्मी और नराधमों को मैं संसार में बारम्बार (अजस्रम्) आसुरी योनियों में ही गिराता हूँ अर्थात् उत्पन्न करता हूँ।।

Sanskrit
English
तान्
those
अहम्
I
द्विषतः (the)
hating (ones)
क्रूरान्
cruel
संसारेषु
in the worlds
नराधमान्
worst among men
क्षिपामि (I)
hurl
अजस्रम्
for ever
अशुभान्
evildoers
आसुरीषु
of demons
एव
only
योनिषु
in wombs.
Hindi

यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण कर्माध्यक्ष और कर्मफलदाता ईश्वर के रूप में यह वाक्य कह रहे हैं? मैं उन्हें आसुरी योनियों में गिराता हूँ। मनुष्य अपनी स्वेच्छा से शुभाशुभ कर्म करता है और उसे कर्म के नियमानुसार ईश्वर फल प्रदान करता है। अत इस फल प्राप्ति में ईश्वर पर पक्षपात का आरोप नहीं किया जा सकता। उदाहरणार्थ? जब एक न्यायाधीश अपराधियों को कारावास या मृत्युदण्ड देता है? तो उसे पक्षपाती नहीं कहा जाता? क्योंकि वह तो केवल विधि के नियमों के अनुसार ही अपना निर्णय देता है। इसी प्रकार? आसुरी भाव के मनुष्