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Gita / Chapter 17.19
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः | परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम्

Transliteration

mūḍhagrāheṇātmano yatpīḍayā kriyate tapaḥ . parasyotsādanārthaṃ vā tattāmasamudāhṛtam

English

That austerity which is undertaken with a foolish intent, by causing pain to oneself, or for the destruction of others-that is said to be born of tamas.

Hindi

जो तप मूढ़तापूर्वक स्वयं को पीड़ित करते हुए अथवा अन्य लोगों के नाश के लिए किया जाता है, वह तप तामस कहा गया है।।

Sanskrit
English
मूढग्राहेण
out of a foolish notion
आत्मनः
of the self
यत्
which
पीडया
with torture
क्रियते
is practised
तपः
austerity
परस्य
of another
उत्सादनार्थम्
for the purpose of destroying
वा
or
तत्
that
तामसम्
Tamasic
उदाहृतम्
is declared.
Hindi

इस श्लोक का अर्थ स्वत स्पष्ट है। एक तपस्वी साधक को तप के वास्तविक स्वरूप? उसके प्रयोजन तथा विधि का सम्यक् ज्ञान होना चाहिए। इस ज्ञान के अभाव में साधक अपने व्यक्तित्व के सुगठन तथा आत्मसाक्षात्कार के मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता।वेदोपदिष्ट तप का विपरीत अर्थ समझने पर मनुष्य उसके द्वारा केवल स्वयं को ही पीड़ित कर सकता है। ऐसे आत्मपीड़न से शुद्ध आत्मा का सौन्दर्य अभिव्यक्त नहीं हो सकता वह तो हमारे पूर्णस्वरूप का केवल उपाहासास्पद व्यंगचित्र ही चित्रित कर सकता है। मूढ़ तामस तप का फल कुरूप व्य