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Gita / Chapter 17.20
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे | देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्

Transliteration

dātavyamiti yaddānaṃ dīyate.anupakāriṇe . deśe kāle ca pātre ca taddānaṃ sāttvikaṃ smṛtam

English

That gift is referred to as born of sattva which gift is given with the idea that it ought to be given, to one who will not serve in return, and at the (proper) place, (proper) time and to a (proper) person.

Hindi

“दान देना ही कर्तव्य है” – इस भाव से जो दान योग्य देश, काल को देखकर ऐसे (योग्य) पात्र (व्यक्ति) को दिया जाता है, जिससे प्रत्युपकार की अपेक्षा नहीं होती है, वह दान सात्त्विक माना गया है।।

Sanskrit
English
दातव्यम्
ought to be given
इति
thus
यत्
that
दानम्
gift
दीयते
is given
अनुपकारिणे
to one who does no service (in return)
देशे
in a fit place
काले
in time
च
and
पात्रे
to a worthy person
च
and
तत्
that
दानम्
gift
सात्त्विकम्
Sattvic
स्मृतम्
is held to be.
Hindi

दान को कर्तव्य समझकर दिये जाने पर वह सात्त्विक दान कहलाता है। दान का ग्रहणकर्ता ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो प्रत्युपकार करने में असमर्थ हो। इसी प्रकार दान देते समय देश? काल और पात्र की योग्यता का भी विचार करना चाहिए। जिस देश काल में जिस वस्तु का अभाव हो? वही देशकाल उस वस्तु के द्वारा प्राणियों की सेवा करने के लिए योग्य समझा जाता है जैसे अकालग्रस्त प्रान्त में अन्नदान। योग्य पात्र से तात्पर्य अनाथ? दुखी? असमर्थ तथा श्रेष्ठ आचरणों वाले विद्वान जनों से है।कुछ विद्वानों का यह मत है कि दान दे