Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 2.1
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सञ्जय उवाच | तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् | विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः

Transliteration

sañjaya uvāca . taṃ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam . viṣīdantamidaṃ vākyamuvāca madhusūdanaḥ

English

Sanjaya said To him who had been thus filled with pity, whose eyes were filled with tears and showed distress, and who was sorrowing, Madhusudana uttered these words:

Hindi

संजय ने कहा — इस प्रकार करुणा और विषाद से अभिभूत,  अश्रुपूरित नेत्रों वाले आकुल अर्जुन से मधुसूदन ने यह वाक्य कहा।।

Sanskrit
English
तम्
to him
तथा
thus
कृपया
with pity
आविष्टम्
overcome
अश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्
with eyes filled with tears and agitated
विषीदन्तम्
despondent
इदम्
this
वाक्यम्
speech
उवाच
spoke
मघुसूदनः
Madhusudana.No commentary.
Hindi

द्वितीय अध्याय का प्रारम्भ संजय के कथन से होता है जिसमें वह चुने हुये शब्दों से अर्जुन की विषादमयी मानसिक स्थिति का स्पष्ट चित्रण करता है। अर्जुन का मन करुणा और विषाद से भर गया है। इस युक्ति से स्पष्ट होता है कि अर्जुन परिस्थितियों का स्वामी न होकर स्वयं उनका शिकार हो गया था। इस प्रकार एक दुर्बल व्यक्ति ही परिस्थितियों का शिकार बनकर जीवन संघर्ष के प्रत्येक अवसर पर असफल होता है। अर्जुन अपनी नैराश्यपूर्ण अवस्था में इस समय ऐसी ही बाह्य परिस्थितियों का शिकार हो गया था। अर्जुन की विषादावस्था