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Gita / Chapter 2.71
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः | निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति

Transliteration

vihāya kāmānyaḥ sarvānpumāṃścarati niḥspṛhaḥ . nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati

English

That man attains peace who, after rejecting all desires, moves about free from hankering, without the idea of (‘me’ and) ‘mine’, and devoid of pride.

Hindi

जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर स्पृहारहित? ममभाव रहित और निरहंकार हुआ विचरण करता है? वह शान्ति प्राप्त करता है।।

Sanskrit
English
विहाय
abandoning
कामान्
desires
यः
that
सर्वान्
all
पुमान्
man
चरति
moves about
निःस्पृहः
free from longing
निर्ममः
devoid of mineness
निरहंकारः
without egoism
सः
he
शान्तिम्
to peace
अधिगच्छति
attains.
Hindi

कुछ व्याख्याकारों का मत है कि इन अन्तिम दो श्लोकों में संन्यास मार्ग की व्याख्या है। वास्तव में गीता में संन्यास की उपेक्षा नहीं की गई है। यह पहले ही बताया जा चुका है कि इस द्वितीय अध्याय में सम्पूर्ण गीता का सार सन्निहित है। इसलिए आगामी समस्त विषयों की रूपरेखा इस अध्याय में दी हुई है। संन्यास मार्ग का वर्णन भी हमें आगे के अध्यायों में विभिन्न संन्दर्भों और स्थानों पर मिलेगा।इसके पूर्व 38वें श्लोक में सभी द्वन्द्वोंें में समभाव से रहते हुए युद्ध करने का उपदेश अर्जुन को दिया गया था। अध्य