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Gita / Chapter 4.25
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते | ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति

Transliteration

daivamevāpare yajñaṃ yoginaḥ paryupāsate . brahmāgnāvapare yajñaṃ yajñenaivopajuhvati

English

Other yogis undertake sacrifice to gods alone, Others offer the Self, as a sacrifice by the Self itself, in the fire of Brahman.

Hindi

कोई योगीजन देवताओं के पूजनरूप यज्ञ को ही करते हैं ; और दूसरे (ज्ञानीजन) ब्रह्मरूप अग्नि में यज्ञ के द्वारा यज्ञ को हवन करते हैं।।

Sanskrit
English
दैवम्
pertaining to Devas
एव
only
अपरे
some
यज्ञम्
sacrifice
योगिनः
Yogis
पर्युपासते
perform
ब्रह्माग्नौ
in the fire of Brahman
अपरे
others
यज्ञम्
sacrifice
यज्ञेन
by sacrifice
एव
verily
उपजुह्वति
offer as sacrifice.
Hindi

जगत् में कार्य करते हुए ज्ञानी पुरुष के हृदय के भाव को ही कुछ श्लोकों में बताया गया है। साधक के मन में एक शंका सदैव उठती है कि ध्यानावस्था में बुद्धि से भी परे अर्थात् उसकी द्रष्टा आत्मा का साक्षात् अनुभव होता है परन्तु कुछ काल के लिये ही। गौतम बुद्ध जैसे कुछ महापुरुषों को हम कार्य में अत्याधिक व्यस्त देखते हैं जबकि कोई महात्मा एक स्थान पर ही रहकर अपने सीमित क्षेत्र में कार्य करते देखे जाते हैं जैसे भगवान् रमण महर्षि। कुछ अन्य सन्त सामान्य जीवन ही व्यतीत करते हैं। साधक को यह जानने की उत