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Gita / Chapter 4.26
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति | शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति

Transliteration

śrotrādīnīndriyāṇyanye saṃyamāgniṣu juhvati . śabdādīnviṣayānanya indriyāgniṣu juhvati

English

Others offer the organs, viz ear etc., in the fires of self-control. Others offer the objects, viz sound etc., in the fires of the organs.

Hindi

अन्य (योगीजन) श्रोत्रादिक सब इन्द्रियों को संयमरूप अग्नि में हवन करते हैं,  और अन्य (लोग) शब्दादिक विषयों को इन्द्रियरूप अग्नि में हवन करते हैं।।

Sanskrit
English
श्रोत्रादीनि इन्द्रियाणि
organ of hearing and other senses
अन्ये
others
संयमाग्निषु
in the fire of restraint
जुह्वति
sacrifice
शब्दादीन् विषयान्
senseobjects such as sound
अन्ये
others
इन्द्रियाग्निषु
in the fire of the senses
जुह्वति
sacrifice.
Hindi

सुपरिचित वैदिक यज्ञ के रूपक के द्वारा यहां सब यज्ञों अर्थात् साधनाओं का निरूपण अर्जुन के लिये किया गया है। यज्ञ विधि में देवताओं का अनुग्रह प्राप्त करने के लिये अग्नि में आहुतियाँ दी जाती थीं। इस रूपक के द्वारा यह दर्शाया गया है कि इस विधि में न केवल आहुति भस्म हो जाती है बल्कि उसके साथ ही देवता का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। आत्मज्ञानी पुरुष अथवा साधकगण श्रोत्रादि इन्द्रियों की आहुति संयमाग्नि में देते हैं अर्थात् वे आत्मसंयम का जीवन जीते हैं। इस प्रकार इन्द्रियों की बहिर्मुखी प्रवृत्