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Gita / Chapter 4.36
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः | सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि

Transliteration

api cedasi pāpebhyaḥ sarvebhyaḥ pāpakṛttamaḥ . sarvaṃ jñānaplavenaiva vṛjinaṃ santariṣyasi

English

Even if you be the worst sinner among all sinners, still you will cross over all the wickedness with the raft of Knowledge alone.

Hindi

यदि तुम सब पापियों से भी अधिक पाप करने वाले हो,  तो भी ज्ञानरूपी नौका द्वारा,  निश्चय ही सम्पूर्ण पापों का तुम संतरण कर जाओगे।।

Sanskrit
English
अपि
even
चेत्
if
असि (thou)
art
पापेभ्यः
than sinners
सर्वेभ्यः (than)
all
पापकृत्तमः
most sinful
सर्वम्
all
ज्ञानप्लवेन
by the raft of knowledge
एव
alone
वृजिनम्
sin
सन्तरिष्यसि (thou)
shalt cross.
Hindi

यद्यपि भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को आत्मसाक्षात्कार का आश्वासन दिया था किन्तु वह अनुभव इतना भव्य और उच्चकोटि का था कि अर्जुन को स्वयं पर विश्वास नहीं हो रहा था। उसकी स्वयं के विषय में यह धारणा थी कि वह इस अनुभव को प्राप्त करने के योग्य नहीं था। जिस किसी विवेकी पुरुष को अपने अवगुणों का भान है उसके मन में ऐसी शंका आ सकती है।वेदान्त ऐसा दर्शन नहीं है कि वह निष्ठुरहृदय होकर पापियों को ज्ञानार्जन से वंचित रखे। वेदान्त इस धारणा में विश्वास नहीं रखता कि कोई व्यक्ति पतित है और वह हीन योनियों म